Angarmoti Temple CG: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के गंगरेल स्थित मां अंगारमोती मंदिर अपनी आस्था और प्राचीन परंपराओं के लिए पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को यहां देव मड़ई का आयोजन होता है। इस अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इस बार भी आयोजन के दौरान संतान प्राप्ति की कामना के लिए 800 से अधिक महिलाएं पेट के बल जमीन पर लेट गईं, जबकि पारंपरिक विधि अनुसार बैगा (स्थानीय पुजारी) उनके ऊपर से गुजरते हुए गर्भगृह तक पहुंचे। मान्यता है कि इस विशेष विधि से मां अंगारमोती कृपा करती हैं और संतान का आशीर्वाद देती हैं।

देव मड़ई की परंपरा
गंगरेल बांध के पास स्थित यह मंदिर प्रकृति की गोद में बसा हुआ है। यहां सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समाज में आस्था की गहरी जड़ें हैं। देव मड़ई हर साल आयोजित होता है और यह सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस परंपरा की विशेषता यह है कि देव मड़ई में शामिल होने वाले श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुंचते हैं और मां अंगारमोती से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Angarmoti Temple CG: क्यों लेटती हैं महिलाएं?
मान्यता है कि जो महिलाएं संतान सुख से वंचित हैं, वे यहां आकर माता से संतान प्राप्ति की प्रार्थना करती हैं। देव मड़ई के दिन वे पेट के बल मंदिर प्रांगण से लेकर गर्भगृह तक लेट जाती हैं। स्थानीय बैगा माता की पूजा करते हुए इन महिलाओं की पीठ के ऊपर से चलकर मंदिर में प्रवेश करते हैं। इसे ‘देह परिक्रमा परंपरा’ भी कहा जाता है और माना जाता है कि इस अनुष्ठान के बाद बंझपन दूर होता है।

1000 साल पुरानी मान्यता
मंदिर के पुजारियों और स्थानीय परंपरागत कथाओं के अनुसार मां अंगारमोती मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है। लोककथाओं में इसका संबंध कांकेर राजवंश और प्रारंभिक आदिवासी धार्मिक मान्यताओं से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि किसी समय गांव में महामारी और संतानहीनता की समस्या फैल गई थी। तब एक आदिवासी महिला को स्वप्न में माता के दर्शन हुए और उन्होंने इस अनुष्ठान की शुरुआत की। उसी के बाद से यह परंपरा निरंतर जारी है।
शक्तिपीठ जैसी मान्यता
Angarmoti Temple CG: यहां माता की मूर्ति स्वाभाविक शिला रूप में विराजित है। किसी भी प्रकार की अलंकरणीय मूर्ति न होकर यह प्राकृतिक शक्ति स्थल माना जाता है। यह क्षेत्र आस्था का शक्तिपीठ भी कहलाता है, क्योंकि श्रद्धालुओं के अनुसार मां अंगारमोती श्रद्धा से की गई हर पुकार सुनती हैं।
यहां विशेष रूप से तीन प्रमुख प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है—
- संतान प्राप्ति
- रोग मुक्ति
- संकट रक्षा

देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
देव मड़ई में छत्तीसगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और झारखंड से भी श्रद्धालु आते हैं। यहां धार्मिक माहौल के साथ-साथ लोकसंस्कृति भी देखने को मिलती है— पारंपरिक ढोल, मांदर, आदिवासी नृत्य और देव बोलावा गीत इस आयोजन की पहचान हैं।

