Maa Saraswati Temple Mp: मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में मां सरस्वती का ऐसा मंदिर है, जहा स्टुडेंट विद्या पाने के लिए माता रानी को स्याही चढ़ाते हैं। यह मंदिर लगभग 300 वर्ष पुराना है, जो कि मुगलकालीन समय का है।
यहां खासकर बसंत पंचमी के दिन भीड़ होती है। इस दिन स्टूडेंट्स पेन , स्याही और किताब लेकर मंदिर पहुंचते है। और माता का स्याही से अभिषेक करते हैं। उनसे सद्बुद्धि देने की कामना करते हैं।
उज्जैन में हा मां सरस्वती का मंदिर
मध्यप्रदेश के उज्जैन में चौरसिया समाज की धर्मशाला सिंहपुरी में माता सरस्वती का मंदिर है, जो करीब 300 साल पुराना मंदिर है। यहां दूर- दूर भक्त माता के दर्शन करने आते हैं। यहां मां की छोटी सी काले पाषाण की प्रतिमा विराजमान है। मंदिर भी छोटा सा ही बना है। लेकिन फिर भी इस मंदिर कई भक्त आते हैं।

क्या है मान्यता?
कहते हैं कि, इस मंदिर में मुख्य रुप से स्टूडेंट ज्यादा आते हैं। वो अपने परीक्षाओं में सफलता पाने की कामना करते हैं। और मां से सद्बुद्धि देने की कामना करते हैं। परीक्षा में सफलता प्राप्ति के लिए देवी के समक्ष कलम, दवात,किताब-कॉपी, पेन रखकर पीले पुष्प अर्पित करते हुए पूजन-अर्चन करना चाहिए।
विशेष रुप से , परीक्षाओं के दिनों में छात्र- छात्राएं यहां आकर इंक और पेन चढ़ाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से विद्या की देवी मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
वसंत पंचमी के दिन यहां होती है भीड़
यहां विशेष रुप से बसंत पंचमी के दिन भीड़ होती है। स्टूडेंट यहां आकर स्याही से माता का अभिषेक करते हैं। कहा जाता है कि माता सरस्वती को पीले पुष्प पसंद है। इसलिए उन्हें वसंत पंचमी के दिन पीले फूल अर्पित करें। बसंत पंचमी पर यह सिलसिला सुबह से लेकर शाम तक चलता रहता है।

