Shiv Navratri Utsav Controversy: बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में हर साल की तरह इस बार भी महाशिवरात्रि के पहले शिवनवरात्रि पर्व का आयोजन किया गया है, इसी बीच महिलाएं उज्जैन मंदिर परिसर में ‘हल्दी खेला’ का आपस में हल्दी लगाकर नाच – गाकर मना रही थी, लेकिन इस पर मंदिर के पुजारी ने नराजगी जताते हुए कहा कि-‘हल्दी खेलना सनातन परंपरा के विपरीत है।’
हल्दी खेला उत्सव मनाने पर हुआ विवाद
उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि से पहले मनाए जा रहे शिवनवरात्रि पर्व के दौरान हल्दी खेला परंपरा को लेकर विवाद छिड़ गया। दरअसल शिव नवरात्रि के अवसर हर दिन पहले सुबह मंदिर परिसर में कोटेश्वर भगवान की पूजा की जाती है। इस दौरान कई महिलाएं भी दर्शन करने आती है। इस दौरान भगवान को रोज उबटन लगाया जाता है।

दर्शन करने के बाद महिलाएं शिवनवरात्रि के दिन हर दिन भजन-कीर्तन करती है। ऐसे में महिलाओं ने आज एक-दूसरे को हल्दी लगाकर नृत्य करते हुए हल्दी खेला का त्योहार मनाया, इस बात से मंदिर के पुजारी नाराज हो गए और इस पर आपत्ति जताई है।
पुजारी ने महिलाओं के द्वारा मनाएं जा रहे हल्दी खेला पर जताई आपत्ति
सूत्रो के मुताबिक, मंदिर परिसर में महिलाओं ने आज हल्दी खेला उत्सव मनाया लेकिन इस पर महाकाल मंदिर के पुजारी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि- ‘शिव नवरात्रि में केवल पूजा, आराधना और संकल्प की परंपरा है। यह पंचमी से शुरू होता है। इसे भगवान के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। आजकल लोग इसे शिव विवाह के रूप में मानते हैं।

इसे मजाक के रूप में हल्दी लगाने और खेलने के रूप में ले लिया गया। जबकि शिव पुराण और अन्य शास्त्रों में शिवरात्रि पर शिव विवाह और इस प्रकार मनाने का जिक्र नहीं है। हल्दी खेलना सनातन परंपरा के विपरीत है। हल्दी लगाने की परंपरा भी घातक न हो जाए। इसलिए मंदिर समिति से इस पर समय रहते प्रतिबंध लगाने की मांग की है।’
हल्दी खेलने पर पुजारी जी ने मंदिर प्रसाशक से की शिकायत
मंदिर प्रशासन को हल्दी खेलने के संबंध में शिकायतें की गई। कहा गया कि- ‘मंदिर परिसर में परंपरा के विपरीत हल्दी खेलने का आयोजन किया जा रहा है।’ शिकायत के बाद प्रशासक ने संकेत दिए हैं कि इस पर रोक लगाई जाएगी।
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