Navgrah Temple Dabra: मध्य प्रदेश के ग्वालियर के पास छोटा सा नगर डबरा अब एक बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक इतिहास का गवाह बनने जा रहा है। इस स्थान पर विश्व का पहला नवग्रह शक्तिपीठ बनाया जा रहा है, जहां नौ ग्रह अपने-अपने स्वरूप के साथ पत्नी सहित विराजमान हैं। यह मंदिर बहुत भव्य और खूबसूरत है। इसका न सिर्फ प्रदेश बल्कि विश्व पटल पर आस्था के नए केंद्र के रूप में स्थापना की जा रही है।

डबरा में इन दिनों उत्साह का माहौल है, गलियों से लेकर मंदिर परिसर तक, हर जगह इसी आयोजन की चर्चा है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और धार्मिक आयोजनों की जानकारी दी है।
प्राण प्रतिष्ठा को लेकर नरोत्तम मिश्रा ने दी जानकारी
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने नवग्रह शक्तिपीठ की स्थापना कब है और धार्मिक कार्यक्रम के आयोजनों के बारें में जानकारी दी और बताया कि- ‘नवग्रह शक्तिपीठ की प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन 10 फरवरी से 20 फरवरी तक किया जाएगा। महोत्सव की शुरुआत 10 फरवरी को स्टेडियम ग्राउंड से भव्य कलश यात्रा के साथ होगी, जो नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए नवग्रह शक्तिपीठ पहुंचेगी। इस कलश यात्रा में 20 हजार से अधिक महिलाओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे पूरा डबरा नगर एक धार्मिक उत्सव में तब्दील हो जाएगा।

डबरा में उत्साह का महौल
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने आगे कहा कि – ‘यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि डबरा की सामूहिक आस्था का प्रतीक है। पूरा नगर एक परिवार की तरह इस आयोजन को सफल बनाने में लगा हुआ है। कोई व्यवस्था संभाल रहा है, तो कोई सेवा कार्य में जुटा है। उनका कहना है कि विश्व का पहला नवग्रह शक्तिपीठ डबरा को आध्यात्मिक पर्यटन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बना सकता है।
11 फरवरी से होंगे धार्मिक आयोजन
शहर में उत्साह का माहौल है। यह महोत्सव 10 दिनों तक चलेगा, जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 11 से 13 फरवरी तक पंडित प्रदीप मिश्रा शिव महापुराण कथा सुनाएंगे। 14 से 16 फरवरी तक कुमार विश्वास अपनी भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति ‘अपने-अपने राम’ देंगे। और 17 से 20 फरवरी तक बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री कथा और दिव्य दरबार आयोजित करेंगे।

प्रतिदिन होगा लाखों का हवन
इसी अवधि में नवग्रह शक्तिपीठ परिसर में बनी नौ मंजिला भव्य यज्ञशाला में प्रतिदिन विशेष अनुष्ठान होंगे। हर दिन प्रत्येक ग्रह देवता के लिए 1-1 लाख आहुतियां दी जाएंगी। संत बद्रीश जी महाराज और उनके 70 उपासक विधि-विधान से पूजन संपन्न कराएंगे, जबकि दांती महाराज पूरे दस दिनों तक विशेष अनुष्ठान करेंगे।

