Lord Narasimha Temple CG: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नरसिंह भगवान का एक बहुत ही प्राचीन मंदिर है, जो बूढ़ातालाब के सामने ब्रम्ह्मपुरी इलाके में स्थित है, यहां भगवान विष्णु अपने नरसिंह रुप में विराजमान है। यह मंदिर नरसिंह भगवान को समर्पित है। आइए जाने मंदिर से जुड़ी खास बातें…
कहां स्थित है नरसिंह भगवान का मंदिर
छत्तीसगढ़ का सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर में से एक है यह नरसिंह भगवान का मंदिर जो बूढ़ातालाब के ठीक सामने ब्रह्मपुरी में स्थापित है, यहां भगवान विष्णु के नर औऱ सिंह का मिश्रित रुप में नृसिंह देव विराजमान है।

यहां प्रतिमा में नरसिंह भगवान ने अपनी जांघो पर राक्षस हिरणयकश्यप को लिटाकर उसके सीने से नाखून को चिरते वही एक ओर परमभक्त प्रहलाद उनकी गोद में सुरक्षित बैठे हैं।
नृसिंह जयंती पर होते हैं विशेष उत्सव
यहां वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को धूमधाम से मनाया जाता है, जिसे नरसिंह चौदस भी कहा जाता है, कहते है, इस दिन भागवान विष्णु ने नरसिंह का रुप धरकर प्रकट हुए थे, और हिरण्यकश्यप का संहार किया था। इस तिथि पर यहां भव्य आयोजन होते है, इसमें शामिल होने के लिए दूर – दूर से भक्त भगवान के दर्शन करने आते हैं।

मौसम के अनुसार रहता है भगवान का तापमान
लगभग 1155 साल पहले मंदिर की स्थापना हुई थी। यहां विराजमान भगवान नृसिंह की प्रतिमा अष्टधातु से बनी हुई है, जिसकी एक अद्भुत विशेषता है। गर्मियों में प्रतिमा को छूने पर वह बिल्कुल ठंडी रहती है, जबकि सर्दियों के समय प्रतिमा को छूने पर गर्माहट महसूस होती है।

इसका रहस्य गर्भगृह की संरचना में छिपा है, जो मोटे पत्थरों से बना है। यहां कोई एयर कंडीशनर, कूलर या पंखा नहीं है, फिर भी गर्मियों में अंदर का वातावरण ठंडा रहता है। स्थानीय निवासी इसे दैवीय चमत्कार मानते हैं।
28 खंभों में टिका है मंदिर
इस मंदिर का निर्माण भोसले राजवंश के राजा हरहरवंशी ने करवाया था। यह पूरा मंदिर 28 मजबूत खंभों पर टिका हुआ है, जहां हर खंभा एक ही पत्थर को तराशकर बनाया गया है—बिना किसी जोड़ के। प्रत्येक खंभा 3 फीट चौड़ा और 10 फीट ऊंचा है। मंदिर में दो गर्भगृह हैं, जो 4 फीट चौड़े और 7 फीट ऊंचे हैं। यह संरचना प्राचीन वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

अन्य देवताएं और उत्सवमंदिर परिसर में भगवान राम, सीता, हनुमान, राधा-कृष्ण, सत्यनारायण के अलावा कल्चुरी काल का प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है। यहां रामनवमी, जानकी जन्मोत्सव, हनुमान जयंती, कृष्ण जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि और गोवर्धन पूजा जैसे पर्व धूमधाम से मनाए जाते हैं।

