1st Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में हर दिन का विशेष महत्व होता है, और महिने में कुछ तिथियां आती है, जिसका हिंदू धर्म में बहुत महत्व होता है, जैसे – एकादशी व्रत, पूर्णिमा , प्रदोष व्रत तो आज हम बताएंगे की 2026 में पहला प्रदोष व्रत कब है और शुभ मुहूर्त कौन सा है। कैसे रखें व्रत?
कब होता है प्रदोष व्रत?
हर महिने में प्रदोष व्रत आता जिसका हिंदू में विशेष महत्व है। यह व्रत कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ की माता पार्वती के साथ पूजा की जाती है। इससे भगवान भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती प्रसन्न होती हैं, भक्तों पर माता पार्वती और भगवान शंकर की कृपा बनी रहती है।
इस व्रत का क्या है महत्व?
हर एक व्रत का सनातन धर्म में अपना विशेष महत्व है, सभी व्रतों में अलग – अलग भगवान की पूजा की जाती है। ऐसे में प्रदोष व्रत के दिन शिव और शक्ति की साथ में पूजा की जाती है, कुछ भक्त इस दिन व्रत भी रहते हैं। प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करते हैं। फिर व्रत की शुरुआत करते हैं।

जानिए शुभ मुहूर्त?
साल 2026 में पहला व्रत 1 जनवरी गुरुवार के दिन पड़ेगा। इस व्रत को करने से जीवन में खुशहाली आती है। और अगर आप भगवान का सच्चे दिल से व्रत करते है और पूजन करते है तो आप पर भगवान की कृपा बनी रहती है।
प्रदोष व्रत 1 जनवरी गुरुवार को प्रदोष काल में 4 बजकर 55 मिनट से लेकर 6 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में भगवान भोलेनाथ की माता पार्वती के साथ पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे आप पर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की कृपा आप पर बनी रहती है।
इस तरह रखें व्रत?
प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन 1 जनवरी को है। व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद साफ सुथरे कपड़े पहने फिर गंगाजल से घर के मंदिर में छिड़काव करें। इसके बाद एक चौकी में साफ कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर रखे फिर गंगाजल, दूध, दही, शहद से रुद्राभिषेक करें और बेलपत्र, फूल, अक्षत , चंदन , दीप – धूप आदि आर्पित करें। इस दिन भगवान भोलेनाथ का भजन करें ‘ओम नम: शिवाय’ मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान शिवजी और माता – पार्वती की सच्चे मन से आरती करनी चाहिए।

