Shiv Tandav Pratima Mp: बुंदेलखंड में भगवान भोलेनाथ की अनोखी प्रतिमा विराजमान है, यह प्रतिमा महोबा के गोरखगिरि पर्वत पर मदन सागर सरोवर के पश्चिम में विराजमान है, इस प्रतिमा को शिव तांडव के नाम से जाना जाता है, क्योकि यहां भगवान भोलेनात की प्रतिमा ग्रेनाइट शिला पर उकेरी हुई तांडव नृत्य करते हुए स्थापित की गई है।
किसने और कब बनवाई यह प्रतिमा?
इस प्रतिमा को 11वीं सदी में चंदेल काल के राजा नान्नुक ने बनावाया था, बताया जाता है, यह प्रतिमा एक चट्टान पर उकेरी गई है। यह प्रतिमा तांडव नृत्य की मुद्रा में है, जो कि भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। प्रतिमा में खास बात है कि दस भुजी गजानन प्रतिमा का निर्माण कराया गया है। अब यह प्रतिमा पूरे देश में शिव तांडव के नाम से प्रसिद्ध है।उ त्तर भारत में विराजमान इस अनोखी प्रतिमा का वर्णन कर्मपुराण में मिलता है।

विशेष त्योहारों पर भक्तों की उमड़ती भीड़
वैसे तो यहां सोमवार के दिन भक्तो की काफी भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन सावन के समय, महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति के दिन भक्तों की काफी भीड़ देखने को मिलती है। यहां लोग देश – प्रदेश से भगवान के दर्शन करने आते हैं।
जानिए क्या है मान्यता?
यहां की मान्यता है कि, भगवान शिव की तांडव प्रतिमा के सामने सर झूकाने से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है। इसे गोरखगिरि का पहला और मुख्य द्वार मानते है, यहां शिव पहरेदार के रुप में विराजमान हैं। उनकी पूजा से सभी कष्ट दूर होते हैं। यहां के दर्शन करे के बाद ही बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जाते हैं।

कहते हैं कि, जब भगवान शिव ने गजासुर का वध किया था, फिर उसके बाद शिवतांडव नृत्य किया था वहीं शिव तांडव की प्रतिमा यहां विराजमान हैं।

