Maa Patal Bhairavi Temple: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर में स्थित मां पाताल भैरवी मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर अपने अनोखे स्वरूप और धार्मिक महत्व की वजह से पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। यहां मां पाताल भैरवी के साथ-साथ 12 ज्योतिर्लिंगों, मां राजराजेश्वरी, और अष्ट महाविद्या के दर्शन एक ही स्थान पर किए जा सकते हैं।
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बर्फानी धाम में स्थित है भव्य मंदिर परिसर
यह मंदिर राजनांदगांव के नेशनल हाईवे 53 पर स्थित बर्फानी धाम परिसर में बना है। दूर से देखने पर यह मंदिर विशाल शिवलिंग के आकार में दिखाई देता है, जो इसे और भी आकर्षक बनाता है। मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु मां पताल भैरवी के अद्भुत स्वरुप के साथ शिवलिंग के दर्शन करने आते हैं।

पाताल में विराजती मां भैरवी की दिव्य प्रतिमा…
संस्कारधानी राजनांदगांव में यह मंदिर जमीन से करीब 15 फीट नीचे स्थित है। गर्भगृह में स्थापित मां पाताल भैरवी की प्रतिमा लगभग 15 फीट ऊंची और 11 टन वजन की है।
पुराणों के अनुसार, देवी काली ने रौद्र रूप में पाताल लोक में निवास किया था, इसी कारण इस देवी स्वरूप को “पाताल भैरवी” कहा जाता है।

जहां एक साथ होते हैं कई देवी-देवताओं के दर्शन
मंदिर का निर्माण वर्ष 1998 में हुआ था और यह 3 मंजिला संरचना में बना है—
- पहली मंजिल में है पाताल भैरवी का शक्तिशाली स्वरूप।
- दूसरी मंजिल पर त्रिपुर सुंदरी (नवदुर्गा) का मंदिर स्थित है।
- तीसरी मंजिल पर भगवान शिव की विशाल प्रतिमा और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन एक साथ किए जा सकते हैं।
इस तरह, यह मंदिर एक ही परिसर में देवी और देवता के अनेक स्वरूपों के दर्शन का अवसर प्रदान करता है।
नंदी और हनुमान जी की प्रतिमाएं बढ़ाती हैं भक्ति का आकर्षण…
मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने विशाल नंदी प्रतिमा स्थापित है, जो भगवान शिव के वाहन के रूप में पूजनीय है। वहीं मंदिर परिसर में हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थित है, जहां भक्त विशेष रूप से दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

भक्तों की भीड़ और धार्मिक आस्था का संगम..
राजनांदगांव के अलावा दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। विशेष अवसरों और नवरात्रि के दौरान मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है। भक्तजन यहां दर्शन के साथ-साथ परिवार के साथ समय भी बिताते हैं।

आस्था और स्थापत्य का संगम..
मां पाताल भैरवी मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, स्थापत्य और शक्ति उपासना का संगम है। यहां आने वाले हर भक्त को यह अनुभव होता है कि यह स्थान देवी की अलौकिक शक्ति और भक्ति का प्रतीक है।

