Madhya Pradesh Culture: प्रदेश के गांवों में अनेक ऐसी परंपराएं और प्रथाएं आज भी जीवित हैं जो समाज की एकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और आस्था का प्रतीक हैं। ऐसी ही एक अनोखी प्रथा है “नवदूर्वा पूजा”, जो विशेष रूप से मालवा और निमाड़ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में प्रचलित है।
ग्रामीण इलाकों में प्रचलित

इस प्रथा के अनुसार हर वर्ष श्रावण माह के अंतिम सोमवार को गांव की महिलाएं और बच्चे मिलकर खेतों से ताज़ी दूर्वा (घास) लाते हैं। इस दूर्वा को नौ अलग-अलग प्रकार की मिट्टियों के साथ मिलाकर भगवान गणेश की प्रतिमा बनाई जाती है।
भगवान गणेश की प्रतिमा बनाई जाती
फिर पूरे गांव के लोग सामूहिक रूप से पूजा करते हैं और गांव की समृद्धि, अच्छी फसल और परिवारों के कल्याण की कामना करते हैं।
पूजा के बाद महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं और बच्चे घर-घर जाकर दूर्वा बांटते हैं, जिसे शुभ माना जाता है।
Madhya Pradesh Culture: पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश

यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था से नहीं जुड़ी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है…क्योंकि इस दिन गांव वाले पेड़-पौधों और फसलों की रक्षा का संकल्प लेते हैं।
सामुदायिक एकता से जोड़ने का एक सुंदर माध्यम
आज के आधुनिक युग में भी यह प्रथा गांवों में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। यह न केवल ग्रामीण जीवन की सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि लोगों को अपने पर्यावरण, परंपरा और सामुदायिक एकता से जोड़ने का एक सुंदर माध्यम भी है।
संस्कृति की जीवंत मिसाल
इस तरह “नवदूर्वा पूजा” मध्य प्रदेश की ग्रामीण संस्कृति की जीवंत मिसाल है, जो बताती है कि परंपराएं केवल रीतियां नहीं, बल्कि जीवन जीने का सच्चा आधार होती हैं।

