Ravan Death Reason Mythology: नवरात्रि के त्योहार का समापन विजयादशमी या यूं कहें दशहरे के दिन होता है। यह पर्व पूरे भारत में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। दशहरे के दिन ही भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था।
रावण का नाम सुनते ही हमारे मन में एक खलनायक की छवि बन जाती है। लेकिन क्या आपको पता है, धार्मिक ग्रंथों में रावण को एक महान विद्वान, शिवभक्त और अपार शक्ति से संपन्न राजा के रुप में भी किया गया है। वह इतना बलशाली था कि स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल तक पर विजय प्राप्त कर चुका था।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि रावण आखिर कैसे पराजित हुआ? पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण के अंत की वजह सीता हरण ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे रावण को मिले कई श्राप हैं, जिसकी वजह से रावण की मृत्यु हुई।
रावण को मिले थे ये श्राप…
रघुवंशी अनरण्य का श्राप…
त्रेतायुग में जब रावण अपनी विजय यात्रा पर निकला, तब उसने रघुवंशी राजा अनरण्य को परास्त किया। मरते समय राजा अनरणय ने रावण को श्राप दिया कि – मेरे वंश में जन्म लेने वाला कोई राजा ही तेरा वध करेगा। यही श्राप आगे चलकर सत्य हुआ। इसी वजह से भगवान राम के हाथो रावण का वध हुआ।
नंदी ने दिया था रावण को श्राप…
रावण भगवान शंकर का परम भक्त था। ऐसे में रावण एक बार भगवान शिव के दर्शन करने गया। तब वहां उसे नंदीजी दिखाई दिए। नंदीजी के स्वरुप को देखकर रावण ने उनका मजाक उड़ाते हुए कहा उनकी शक्ल वानर जैसी है, जिससे नंदीजी क्रोधित हो गए और रावण को श्राप दिया की। एक दिन बंदरों की वजह से उसका सर्वनाश होगा।

इसी वजह से जब रामजी सीता माता को छुड़ाने गए तो वानर सेना और हनुमान जी ने मिलकर उस पुल का निर्माण किया, जिससे सब लोग लंका पहुंच सके।
विष्णु भक्त महिला का श्राप…
एक बार रावण ने एक विष्णु भक्त महिला की तपस्या भंग करने की कोशिश की। उस महिला ने आहत होकर रावण को श्राप दिया कि उसकी मृत्यु स्वंय भगवान विष्णु के अवतार के हाथों ही होगी। यही कारण है कि भगवान विष्णु ने राम के रुप में अवतार लिया और रावण का वध किया।
अप्सरा रंभा और नलकुबेर का श्राप…
अप्सरा रंभा नलकुबेर की पत्नी बनने वाली थी। रंभा ने रावण से स्वंय को पुत्रवधू के समान मानकर छोड़ने की विनती की लेकिन अपने अंहकार और वासना में अंधे रावण ने उसकी बात नहीं मानी, ऐसे में नलकुबेर वहां पहुंच गए और उन्होंने रावण को श्राप दिया कि यदि वह किसी स्त्री को जबरदस्ती हाथ लगाएगा, तो उसी क्षण उसका वध हो जाएगा। इसी वजह से रावण माता सीता को हाथ नहीं लगा पाया।

शूर्पणखा का दिया श्राप…
रावण की बहन शूर्पणखा का पति विद्युतजिव्हा कालकेश राजा की सेना का सेनापति था। रावण के युद्ध में उसकी मृत्यु हो गई। इससे आहत होकर शूर्पणखा ने अपने ही भाई को श्राप दिया कि वह उसकी मृत्यु का कारण बनेगी। यही श्राप आगे चलकर तब सत्य हुआ, जब शूर्पणखा सीता की हरण की वजह बनी , जिसके बाद रावण का अंत हुआ।

माया (मंददोदरी की बहन) का श्राप…
रावण की वासना की सीम इतनी बढ़ गई थी कि उसने अपनी पत्नी मंदोदरी की बहन माया का सतीत्व भंग करने की कोशिश की। अपमानित होकर माया ने रावण को श्राप दिया कि उसकी मृत्यु का कारण एक स्त्री ही बनेगी। यही वजह है कि माता सीता के अपहरण के बाद रावण का अंत भगवान राम के हाथों हुआ।

