3 Famous Shiva Temples in Bhopal: भोपाल शहर न सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां अनेको चमत्कारी और अद्भुत मंदिर हैं, जिसमें से तीन भोपाल के सबसे प्रसिद्ध मंदिर है, तीनों मंदिर की अलग- अलग हैरान कर देने वाली कथाएं हैं। अगर आप वहां विराजमान शिवलिंग के स्थापना की कथा सुनेगे हैरान रह जाएंगे।
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भोपाल के 3 बेहद प्रसिद्ध मंदिर
गुफा मंदिर (लालघाटी क्षेत्र)
राजधानी भोपाल के लाल घाटी क्षेत्र में एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो कि भागवान शंकर को समर्पित है, यह मंदिर गुफा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। यहां दूर – दूर से श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने आते है। इस मंदिर में 7 प्रकृतिक गुफाएं हैं। कहा जाता है यहां भगवान शिव स्वंय पिंडी के रुप में प्रकट हुए थे, इसलिए इस मंदिर को स्वंयभू शिव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

आपको बता दें कि, यहां भगवान शंकर के अलावा भगवान राम माता जानकी, लक्ष्मण और अपने प्रिय भक्त हनुमान जी के साथ विराजमान हैं, यहां भगवान कृष्ण, विष्णु भगवान सहित कई देवी – देवता विराजमान हैं।
भोजेश्वर मंदिर
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपल से लगभग 32 किमी की दूरी पर रायसेन जिले में एक अनोखा शिव मंदिर है, जो कि भोजेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर बेतवा नदी किनारे बसा प्राकृतिक पहाड़ियो से घिरा हुआ मंदिर है। इस मंदिर में लगभग 7.5 फीट के शिवलिंग विराजमान हैं।

मान्यता है कि, यह शिवलिंग एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है। खास बात यह है कि यह एक ही पत्थर से बना हुआ शिवलिंग है, यह विशाल जलहरी जो कि शिवलिंग के नीचे का भाग होता है, उसमें विराजमान है, इसकी परिधि 17.8 फीट है। इस मंदिर के बनने के पीछे दो कथाएं है, एक कथा में बताया गया कि इस मंदिर को राजवंश के राजा भोज ने बनाया। वहीं एक कथा के अनुसार, माता कुंती की पूजा के लिए इस मंदिर को 5 पांडव ने बनवाया था।
बड़वाले महादेव मंदिर ( कायस्थपुरा, भोपाल)
राजधानी भोपाल के कायस्थपुरा क्षेत्र में भोलेनाथ का एक मंदिर जो कि लगभग 400 साल पुराना है, यह मंदिर श्री बड़वाले महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। यहां हर दिन भगा वन की पूजा की जाती है, यह भोपाल का सबसे पुराना मंदिर है, इस मंदिर की खास बात यह है कि बड़ के वृक्ष में शिवलिंग विराजमान हैं।

स्थानीय लोग बताते है, यहां सालो पहले जंगल हुआ करता था, चारो तरफ हरियाली ही हरीयाली थी। एक दिन एक साधु बड़ के पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे, अचानक उनका सर पेड़ के जड़ से टकरा गया, जब साधु ने उस जगह की मिट्टी हटाई तो शिवलिंग दिखाई देने लगे। तो वहां खुदाई कर मिट्टी हटाई गई और शिवलिंग की स्थापना की गई। अब वहां भव्य मंदिर बनाया जा रहा है।

