श्राद्ध में तर्पण कैसे करें:  सही विधि और नियम

तर्पण का अर्थ है पितरों को जल अर्पित करना ताकि उनकी आत्मा तृप्त हो।

तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करें और कुश के आसन पर बैठें।

अपने नाम, गोत्र और पितरों का स्मरण करते हुए संकल्प लें।

अंजलि में जल लेकर “ॐ पितृभ्यः स्वधा” मंत्र बोलते हुए जल दक्षिण दिशा में प्रवाहित करें।

जल छलकाएँ नहीं, धीरे-धीरे बहाएँ। तर्पण के बाद दान-पुण्य अवश्य करें।

ताम्बे/पीतल के लोटे में जल, काला तिल, कुशा और पुष्प रखें।

श्रद्धा और शुद्ध मन से किया गया तर्पण पितरों को तृप्त करता है और वंश को आशीर्वाद दिलाता है।